अनन्त

अनन्त से अनन्त तक 
मिलता नहीं कोई अन्त 
अन्त की अभिलाषा लिए 
ढूंढता रहा अन्त को।

अन्त कितना है प्रबल 
अन्त कितना है मधुर 
अन्त का परिणाम है 
अनन्त की शुरुआत है।

किसी ने ठीक कहा 
किसने देखा है अन्त 
अनन्त से जूझता रहा 
अन्त है कहीं नहीं ।

जीवन एक शुरुआत है 
या है इसका अन्त।

Created on 23/9/2025
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@ Ramesh Rai 

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