बसन्त का आगमन - 2
हर वीणा हर मृदंग में
हर शहनाई बांसुरी की धुन में da
फागुन के रस में रम जाओ
हे सखी तुम ऋतु बसन्त में आओ।
लाना अपने संग सखी रे
चम्पा और चमेली लाना
पारिजात संग रजनीगन्धा
और गुलाब लीली को लाना।
कमल नयन जैसी तुम्हारी आँखें
बन बावरी सदा बहार लाना
जीवन प्रसंग में बसा हुआ
चित चंचल सूरजमुखी बन आना।
जब प्रकृति भींगी होगी
श्रृंगार रस के मधुशाला में
तब तुम हे सखी
पायल छम छम बजाते आना।
04/10/2025
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@ Ramesh Rai