तुम जीवन भर गीत रचे।
तुम जीवन भर गीत रचे
क्या पाया गीतों को रचकर।
हर कल्प।ना से जूझ रहे
फिर भी गीत अधूरा रहा।।
बस एक गीत तो गाओ
जिसको सुनकर संतृप हो जाऊं।
भाव विभोर हो जाऊं मै
फिर न कोई गीत अपनाऊ।।
शब्दों को तुम जोड़ जोड़कर
एक एक वाक्य बनाते हो।
हर उन वाक्यों में तुम
प्रेम सुधा बरसाते हो।।
सुनकर प्रेमगीत ओ प्रीतम
पायल की झंकार उठी।
वीणा के शब्दों से भरी
अमृत की बरखा बनी।।
Created on 19/9/2025
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@ Ramesh Rai