दुर्गा पूजा

हाल ही मे मुझे एक पोस्ट पढ़ने को मिला जिसमे आज हो रही दुर्गा पूजा का वर्णन मिलता है कि कैसे कंस देव राय द्वारा आयोजित दुर्गा पूजा सार्वजनिक हो गया। मै इस पर विचार विमर्श और आलोचना की और मैं इस निष्कर्ष पर पहुंचा। 1) दुर्गा पूजा और नवरात्रि एक नहीं है। नवरात्रि व्यक्तिगत है जबकि दुर्गा पूजा सार्वजनिक है। नव रात्रि का प्रचलन आदि काल से है दुर्गा पूजा राजा कंस देव राय से शुरू होती है जो मुस्लिम पीरीयड में हुआ है अर्थात तीन से चार सौ साल पहले हुआ था। चूंकि दुर्गा पूजा में प्रतिमा बनाया जाता है फिर उसमें प्राण प्रतिष्ठा होती है। बहुत संभव ऐसा पूजन व्यक्तिगत तौर पर करने से मनाही हो जिसमें प्राण प्रतिष्ठा की बात हो। लेकिन राजा या जमींदारों के लिए मान्य है क्योंकि राजा या जमींदार प्रजा का प्रतिनिधित्व करते हैं।

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